भूख






एक गरीब परिवार था।जिसमें दस लोग थे।
माँ, बाप और उनके आठ बच्चे।ज्यादा बच्चे होने के कारण
बाप अपने बच्चों का पेट नही भर सकता था। वे गरीब होने के कारण  कोई उनको काम पर भी नही रखते थे।परंतु एक दिन अचानक उनके पिताजी का देहांत हो जाता है।






बच्चे भिक मांग मांगकर माँ गुब्बारे बेचकर अपना गुजारा करते थे।
लेकिन उनके घर में भूख का अकाल पड जाता है।सभी एक दूसरे पर
मारने के लिए उतर पडे ।

एक दिन अचानक उनके पड़ोसिया उनकी हालात देखकर हररोज बचा हुआ खाना उनको लाकर देते। परंतु अचानक 8 साल का लडका मर जाता है।

तब एक छोटीसी नौ साल की लडकी अपनी माँ से कहती है कि माँ
हम भूखे नही रहेंगे।हमे अभी बहुत सारा खाना मिलेगा।परंतु माँ मेरा 
छोटा भाई इतना बीमार है वह कब मरेग,मुझे बहुत भूख लगी हैं।

क्या यही है वो हमारा भारत जहाँ गरीब बच्चे ,बूढे अभी भी खाना खाने के लिए तरस रहे हैं।भूख के लिए तरस रहे हैं।

महात्मा गांधी जी ने सही कहा है कि......

दुनिया में ऐसे लोग हैं,
जो इतने भूखे हैं कि भगवान उन्हें
किसी और रुप में नहीं दिख सकता
सिवाय रोटी के रुप के

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