दादा
भूख चेहरे पे लिए ,चांद से प्यारे बच्चे।
बेचते फिरते हैं गलियों में गुब्बारे बच्चे।।
"दादा ओ दादा चला आम्ही कामावर जाऊया "रमेश ने अपने भाई राकेश से कहा।भाई कहता है-"अरे जाकर क्या करेंगें कोई एक भी गुब्बारा ख़रीदता नही और खरीदेगे तो भी,एक या दो।रमेश यह सुनकर उदास हो गया।इनको भाई के सिवा इस दुनिया में कोई भी नहीं था।
सावन का महीना था।बहुत जोरों से बारिश हो रही थी।हवा जोर-जोरों से बह रही थी।रमेश का घर छुट्टे का था।इसलिए उनके घर में पानी भर गया।उनकी छत भी अच्छी नही थी।उसका बडा भाई अपने छोटे भाई से बहुत प्यार करता था।राकेश ने अपने भाई को उठाकर एक इमारात के अंदर लेकर गया और उसे सुला दिया और अपने घर जाकर सारे गुब्बारे कपडे लेकर उसी इमारत में आया।रमेश को भनक तक नही लगने दी कि वह बारिश में भीगकर सारे गुब्बारे लेकर आया है।सुबह हुई, रमेश उठ गया तो उसने देखा कि उसके भाई बहुत बिमार है।और पैसे भी नहीं ।रमेश गुब्बारे लेकर बेचने चला गया।और थोडे पैसे मिले उससे दवाइया लाकर दी।यह देखकर राकेश को बहुत दुःख हुआ।अपना भाई पढ़ाई करने बल्कि गुब्बारे बेचता है।
कुछ दिनों की बात है।दुपहर का समय था।अचानक एक औरत राकेश को कहने लगी कि मुझे आपके भाई को गोद लेना है।रमेश देखने के लिए बहुत खूबसूरत था।होशियार था। और कहती है कि वह उसे अच्छे पाठशाला में दख़ल करवायेंगी।और अच्छे से देखभाल करेगी।राकेश बहुत सोचने लगा।
दूसरे दिन राकेश रमेश को लेकर उस औरत को सौंप देता है।रमेश अपने भाई को कहता है कि "दादा मला नाही जायच आहे,मला नको सोडू दादा .................दादा"।एक दिन राकेश उस औरत के पास जाता है तो वह औरत कहती है कि एक महीने पहले वह भाग गया।राकेश पूछता है कि कहाँ?कभी?रोते रोते वह अपने घर चला गया।रमेश का एक एक जगह जगह ढूंढने पर भी वह मिला नहीं।
यहाँ उस औरत ने रमेश को कहा कि उसका भाई उसे मिलने आया नही पैसे लेकर चला गया।रमेश बहुत रोता रहा उसे लगने लगा कि उसका भाई लालची है।
कई साल बाद रमेश उसी गली में जाता है तब सभी लोग पूछते हैं कि आप कौन हो?आप राकेश, रमेश को कैसे पहचानते हो?रमेश कहता है कि मैं ही रमेश हूँ।दादा कहाँ है?वे कहते है कि तुम कहा थे।रमेश ने तुम्हें बहुत ढूंडा उस औरत ने कहा तुम भाग गए। रमेश को अपनी गलतियों का एहसास हुआ उसने भी सभी जगह दादा ढूंडा लेकिन वह मिला नहीं।
कई साल बीत गए।रमेश की शादी हो गई ।बच्चे हो गए लेकिन एक दिन वे मंदिर गए तभी उसने देखा कि एक आदमी फटे कपडे और एक शॉल डालकर कुंडों में से खाना ढूंड रहा था।रमेश को अपनापन का एहसास हुआ।और उससे बात करने का प्रयास किया तो उसे मालूम हुआ कि उस आदमी को बात करने नहीं आता है।वह गूँगा हैं।रमेश अपने हाथों से उसे पैसे दे देता हैं।
थोडी देर बाद रमेश मंदिर जाकर आ रहा होता है तो वह सुनता है कि वहीं आदमी थाली लेकर गाना बजा रहा है।जैसे उसके भाई पहले बजाता था।और वह धुन सुनकर रमेश उस आदमी के गले लग गया।रमेश उसे कहता है कि "दादा मी रमेश ।तुम्ही कुठे होतास?राकेश बहुत रोता है।कुछ ही क्षण में रमेश को पता चलता है कि एक रात कुछ चोर उसके घर मे आकर चोरी कर रहे थे तभी राकेश ने उन्हें देखा और झगड़ा किया।शोर न मचाये इसलिये उन्होंने गरम कोयला उसके मुँह में डाल दिया।इसकारण वह गूँगा हो गया।रमेश उसे अपने साथ लेकर जाता है।
भूख चेहरे पे लिए ,चांद से प्यारे बच्चे।
बेचते फिरते हैं गलियों में गुब्बारे बच्चे।।
"दादा ओ दादा चला आम्ही कामावर जाऊया "रमेश ने अपने भाई राकेश से कहा।भाई कहता है-"अरे जाकर क्या करेंगें कोई एक भी गुब्बारा ख़रीदता नही और खरीदेगे तो भी,एक या दो।रमेश यह सुनकर उदास हो गया।इनको भाई के सिवा इस दुनिया में कोई भी नहीं था।
सावन का महीना था।बहुत जोरों से बारिश हो रही थी।हवा जोर-जोरों से बह रही थी।रमेश का घर छुट्टे का था।इसलिए उनके घर में पानी भर गया।उनकी छत भी अच्छी नही थी।उसका बडा भाई अपने छोटे भाई से बहुत प्यार करता था।राकेश ने अपने भाई को उठाकर एक इमारात के अंदर लेकर गया और उसे सुला दिया और अपने घर जाकर सारे गुब्बारे कपडे लेकर उसी इमारत में आया।रमेश को भनक तक नही लगने दी कि वह बारिश में भीगकर सारे गुब्बारे लेकर आया है।सुबह हुई, रमेश उठ गया तो उसने देखा कि उसके भाई बहुत बिमार है।और पैसे भी नहीं ।रमेश गुब्बारे लेकर बेचने चला गया।और थोडे पैसे मिले उससे दवाइया लाकर दी।यह देखकर राकेश को बहुत दुःख हुआ।अपना भाई पढ़ाई करने बल्कि गुब्बारे बेचता है।
कुछ दिनों की बात है।दुपहर का समय था।अचानक एक औरत राकेश को कहने लगी कि मुझे आपके भाई को गोद लेना है।रमेश देखने के लिए बहुत खूबसूरत था।होशियार था। और कहती है कि वह उसे अच्छे पाठशाला में दख़ल करवायेंगी।और अच्छे से देखभाल करेगी।राकेश बहुत सोचने लगा।
दूसरे दिन राकेश रमेश को लेकर उस औरत को सौंप देता है।रमेश अपने भाई को कहता है कि "दादा मला नाही जायच आहे,मला नको सोडू दादा .................दादा"।एक दिन राकेश उस औरत के पास जाता है तो वह औरत कहती है कि एक महीने पहले वह भाग गया।राकेश पूछता है कि कहाँ?कभी?रोते रोते वह अपने घर चला गया।रमेश का एक एक जगह जगह ढूंढने पर भी वह मिला नहीं।
यहाँ उस औरत ने रमेश को कहा कि उसका भाई उसे मिलने आया नही पैसे लेकर चला गया।रमेश बहुत रोता रहा उसे लगने लगा कि उसका भाई लालची है।
कई साल बाद रमेश उसी गली में जाता है तब सभी लोग पूछते हैं कि आप कौन हो?आप राकेश, रमेश को कैसे पहचानते हो?रमेश कहता है कि मैं ही रमेश हूँ।दादा कहाँ है?वे कहते है कि तुम कहा थे।रमेश ने तुम्हें बहुत ढूंडा उस औरत ने कहा तुम भाग गए। रमेश को अपनी गलतियों का एहसास हुआ उसने भी सभी जगह दादा ढूंडा लेकिन वह मिला नहीं।
कई साल बीत गए।रमेश की शादी हो गई ।बच्चे हो गए लेकिन एक दिन वे मंदिर गए तभी उसने देखा कि एक आदमी फटे कपडे और एक शॉल डालकर कुंडों में से खाना ढूंड रहा था।रमेश को अपनापन का एहसास हुआ।और उससे बात करने का प्रयास किया तो उसे मालूम हुआ कि उस आदमी को बात करने नहीं आता है।वह गूँगा हैं।रमेश अपने हाथों से उसे पैसे दे देता हैं।
थोडी देर बाद रमेश मंदिर जाकर आ रहा होता है तो वह सुनता है कि वहीं आदमी थाली लेकर गाना बजा रहा है।जैसे उसके भाई पहले बजाता था।और वह धुन सुनकर रमेश उस आदमी के गले लग गया।रमेश उसे कहता है कि "दादा मी रमेश ।तुम्ही कुठे होतास?राकेश बहुत रोता है।कुछ ही क्षण में रमेश को पता चलता है कि एक रात कुछ चोर उसके घर मे आकर चोरी कर रहे थे तभी राकेश ने उन्हें देखा और झगड़ा किया।शोर न मचाये इसलिये उन्होंने गरम कोयला उसके मुँह में डाल दिया।इसकारण वह गूँगा हो गया।रमेश उसे अपने साथ लेकर जाता है।


Nice
ReplyDeletenice👌
ReplyDeleteNic
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ReplyDeleteNicee.
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