देवदासी की आत्मकथा
मैं एक देवदासी ।मेरा नाम अंगुलिका है।मैं उत्तर प्रदेश की रहिवासी हूँ।जब मुझे पता चला की मुझे देवदासी बनाया गया तो मैं बहुत खुश थी।हररोज भगवान को नमन करती लेकिन अचानक कुछ ऐसी घटना घटी की देवदासी जैसे बनना जैसे मेरे लिए श्राप बन गया।
उस दिन ऐसा हुआ की माँ देर रात मंदिर में भगवान को नमन करके वही सो गई।तो अचानक कुछ लड़कों ने मुझे उठाकर गाडी में डालकर कई अन्य देश में लेकर चले गए।जब मुझे उस घर में रखा तभी मेरे जैसे लडकिया बहुत थे।
वे लोग तहसनहस हो गए थे।वही अचानक मेरी मामी की लडकी वहाँ दिखी।हमे लगा था की वह किसी के साथ भागकर चली गई।तभी मैंने उसे पूछा,"तुम यहाँ क्या कर रही हो?ये लोग कौन है?तभी मामी की लड़की ने कहा कि ये लोग भगवान के नाम लेकर लड़कियों का वैस्या व्यवसाय करने के लिए कहते हैं।
यह सुनकर मैं अवाक रह गई।मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था।इस चुंगुल से कैसे बचे।एक दिन मैं उस धंदे से भाग गई और अपने घर परंतु वहा मैंने देखा कि वही लोग मेरे माँ पिताजी को पैसे दे रहे थे।यह देखकर मुझे रोना आया।
मैंने मन ही मन यह सोच रही थी की क्या बेटी अपनी माँ के लिए इतनी भोज होती है?थोडी देर मैं वापस मुंबई आ गई।पुलिस को बताया लेकिन थोड़े पुलिस उनके साथ थे।मुझे वापस धंदे के लिए लाया गया।मैं बहुत रोई, चिल्लाई मगर कोई मदद के लिए नही आया।
कई साल हो गए।एक लडका मेरे जिंदगी में आया।मैंने उसे सबकुछ बताया ।उसने अपनी जिंदगी मुसीबत में डालकर मेरी मदत की और हमने सभी बच्चों तथा वृद्ध औरतों को उस चुंगुल से छूटकारा दिलाया।


Heart-touching😢😢😢😢😢
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